कांग्रेस नेता अलका लांबा ने ट्वीट करते हुए दावा किया कि उन्हें बीजेपी की राज्यसभा सांसद सोनल मानसिंह ने यह मैसेज व्हाट्सएप पर भेजा है।
क्या वाकई बीजेपी सांसद ऐसा मैसेज फैला रही हैं? बीबीसी ने इस मैसेज की पड़ताल शुरू की। तीन मेल और दो टेक्स्ट मैसेज के बाद इस पर हमें सागर केसरी नाम के व्यक्ति का जवाब मिला, जिसने सोनल मानसिंह के नंबर से ही यह जवाब भेजा है। सागर केसरी का कहना है कि वे सोनल मानसिंह के साथ बतौर असिस्टेंट काम करते हैं। उन्होंने लिखा, ”मेरा नाम सागर केसरी है और मैं सोनल मानसिंह जी के साथ काम करता हूं। मैम के मोबाइल फोन से मैंने दो-तीन लोगों को यह मैसेज भेजा था, ताकि मैं यह जान सकूं कि यह मैसेज सही है या नहीं। लेकिन मैसेज फॉरवर्ड करते वक्त मैं यह लिखना भूल गया। यह मेरी गलती है, मैं माफी मांगता हूं। क्या इस मैसेज को आगे फैलाने से पहले अलका लांबा को सोनल जी से बात नहीं करनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने राजनीतिक फायदे के लिए ऐसा नहीं किया।”
बीबीसी ने इस मामले पर आम आदमी पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुई नेता अलका लांबा से बात की। उन्होंने कहा, ”मैं सोनल जी को जानती हूं लेकिन जब से वह बीजेपी की राज्यसभा सांसद बनी हैं तब से वह ऐसे बीजेपी की आईटी सेल की ओर से बनाए गए मैसेज फैलाने का काम कर रही हैं। लेकिन इस बार देश के माहौल को खराब करने के लिए उन्होंने कांग्रेस के खिलाफ़ झूठ फैलाया तो मुझसे रहा नहीं गया। मैंने इसलिए उनका स्क्रीनशॉट शेयर किया है। एक संवैधानिक पद पर बैठकर ऐसी सोच रखना शोभा नहीं देता।”
इसके बाद हमने इस मैसेज में किए जा रहे दावों की पड़ताल शुरू की। इस वक्त भारत में रह रहे कुल रोहिंग्या शरणार्थियों का आंकड़ा 40 हजार है जबकि इस तस्वीर में कहा जा रहा है कि उनकी संख्या इस वक्त लाखों में है।
आंकड़े क्या कहते हैं
साल 2017 में तत्कालीन गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया था कि इसमें 16,000 संख्या उन रोहिंग्या मुसलमानों की है जो संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थियों के तौर पर पंजीकृत हैं।
अप्रैल 2019 में मिक्स्ड माइग्रेशन सेंटर की एक रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2018 तक भारत में 18,000 ऐसे रिफ्यूजी हैं जिनके पास संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त का रिफ्यूजी कार्ड है।
मैसेज में दावा किया जा रहा है कि रोहिंग्या मुसलमानों का दबदबा कर्नाटक, केरल, बंगाल, पंजाब में है। लेकिन यह गलत दावा है। कर्नाटक को छोड़कर बाकी राज्यों में गैर-बीजेपी सरकार सत्ता में है।
किस राज्य में हैं ज्यादा रोहिंग्या शरणार्थी
मैसेज में किए जा रहे दावों के उलट, कर्नाटक, केरल, बंगाल, पंजाब में इन शरणार्थियों की संख्या सबसे कम है।
- जम्मू और कश्मीर
- आंध्र प्रदेश
- हरियाणा
- दिल्ली
- राजस्थान
ऐसे राज्य जहां सबसे कम रोहिंग्या शरणार्थी हैं
- कर्नाटक
- तमिलनाडु उत्तर प्रदेश
- पश्चिम बंगाल
ऐसे में जो दावा इस स्क्रीनशॉट में किया जा रहा है कि कर्नाटक, केरल, बंगाल और पंजाब में रोहिंग्या शरणार्थी तेजी से बढ़ रहे हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि यह स्क्रीनशॉट झूठी जानकारियों से भरे हैं। सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है यह स्क्रीनशॉट फेक है।
रोहिंग्या कौन हैं?
म्यांमार की बहुसंख्यक आबादी बौद्ध है। म्यांमार में एक अनुमान के मुताबिक 10 लाख रोहिंग्या मुसलमान हैं। इन मुसलमानों के बारे में कहा जाता है कि वे मुख्य रूप से अवैध बांग्लादेशी प्रवासी हैं। म्यांमार की सरकार ने इन्हें नागरिकता देने से इनकार कर दिया है। हालांकि ये म्यांमार में पीढ़ियों से रह रहे हैं। रखाइन प्रांत में 2012 से सांप्रदायिक हिंसा जारी है। इस हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की जानें गई हैं और एक लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं।
भारत में कुल 40 हजार रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं जिनमें से कईयों के पास संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त का रिफ्यूजी कार्ड तक नहीं है।
अक्टूबर 2018 में भारत सरकार ने सात रोहिंग्या शरणार्थियों को म्यांमार वापस भेजा था। इन्हें साल 2012 में गैरकानूनी तरीके से सीमा पार करके भारत आने के आरोप में फॉरनर्स एक्ट कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था।
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